मुंबई: ’13 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए’, अभिजीत दिपके का आरोप– ‘एक देश, एक चुनाव’ से ‘एक देश, एक पार्टी’ की ओर भाजपा

मुंबई: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ‘एक देश, एक चुनाव’ से ‘एक देश, एक पार्टी’ की तरफ जा रही है. उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि 13 करोड़ नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं जो कथित तौर पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के ज़रिए किया गया “वोट चोरी” का काम है.

‘ज्ञानेश कुमार मस्ट गो’ का नारा लगाते हुए दिपके ने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं दिलाती है, तो जंतर-मंतर पर फिर से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. उन्होंने ऐलान किया कि भले ही उन्हें सिर्फ तीन दिन के लिए नहीं बल्कि तीन महीने के लिए जेल में डाल दिया जाए, वह मशहूर “मैं वापस आऊंगा” वाला नारा दोहराते हुए वापस आएंगे.

कांग्रेस, शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने पहले ही ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था. वहीं ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने दादर के छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में प्रदर्शन का आह्वान किया. मुंबई और देश के कई दूसरे हिस्सों से बड़ी संख्या में युवा इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. इसमें शामिल होने वालों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए तख्तियां ले रखी थीं और नुक्कड़ नाटक और म्यूजिकल एक्ट किए.

अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में उम्मीद के मुताबिक सीटें हासिल करने में नाकाम रहने के बाद भाजपा ने महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी धोखाधड़ी की. उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी, एम.के. स्टालिन और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं को हार का सामना करना पड़ा क्योंकि बड़ी संख्या में वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे. पिछले दो सालों में 13 करोड़ वोटरों के नाम वोटर रोल से हटाए जाने पर जोर देते हुए दिपके ने भाजपा की राजनीतिक रणनीति की आलोचना की.

उन्होंने आरोप लगाया कि मैच फिक्सिंग की तरह भाजपा ने कुछ राज्यों में विपक्षी सरकारों को सत्ता में आने दिया. जबकि महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे बड़े राज्यों पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि 2022 से 2026 के बीच 111 मौजूदा सांसद और विधायक चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदल चुके हैं.

उन्होंने भाजपा की क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करने की कोशिश करने के लिए आलोचना की. यह देखते हुए कि कैसे उन्होंने पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और बाद में ममता बनर्जी की पार्टी में फूट डाली. उन्होंने कहा कि अगर विधायक और सासंद को इस तरह से खरीदना है तो चुनाव की कोई जरूरत नहीं है. इसके बजाय उन्हें आईपीएल मैचों के खिलाड़ियों की तरह नीलाम कर देना चाहिए.

उन्होंने एकनाथ शिंदे की बगावत पर भी निशाना साधा. खासकर सूरत से गुवाहाटी तक की यात्रा की आलोचना की. उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में देश की राजनीति हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर केंद्रित रही है. दिपके ने कहा कि नागरिकों को धर्म के नाम पर डराया-धमकाया गया है और विपक्षी दलों के एक होने से 2024 में सत्ता खोने के डर से भाजपा ने वोटों का बंटवारा करवाया.

हालांकि, दिपके ने लोगों से हिंदू-मुस्लिम मतभेदों को अलग रखकर एक होने की अपील की. उन्होंने कहा कि कोई किसी भी पार्टी का समर्थन कर सकता है. लेकिन आज जरूरत है कि हम सब मिलकर भारतीय बनें. उन्होंने देश को बचाने की इस लड़ाई में एकता की अपील की. ​​उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वोटों में हेरफेर करने के लिए ज्ञानेश कुमार का इस्तेमाल कर रही है. दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इस योजना के पीछे मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा स्वीकार नहीं करते हैं तो वे प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए आंदोलन शुरू करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार पद नहीं छोड़ते हैं तो प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना होगा.

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