नई दिल्ली: भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (UBT) के राज्यसभा MP संजय राउत के खिलाफ देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के बारे में उनके पब्लिक बयानों को लेकर दायर किए गए क्रिमिनल कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट केस को अपनी मंजूरी दे दी है.
अटॉर्नी जनरल ने अपने सहमति पत्र में कहा, ‘मेरे विचार से पत्रकार निखिल वागले और सांसद संजय राउत द्वारा किए गए एक्स पोस्ट पहली नजर में शर्मनाक हैं, जिनका मकसद भारत के सुप्रीम कोर्ट और खासकर भारत के चीफ जस्टिस की इज्जत कम करना है.’
पत्र में यह भी कहा गया है कि राउत के एक्स पोस्ट, ‘जिन राज्यों में बीजेपी सत्ता में है, वहां जजों के बीजेपी के पॉलिटिकल प्रोग्राम में शामिल होने और मुख्यमंत्रियों के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के स्वागत में डिनर ऑर्गनाइज करने…” के बारे में किसी भी फैक्ट्स पर आधारित नहीं हैं.
एक्स पोस्ट का दूसरा हिस्सा भी बिना किसी वेरिफिकेशन के बनाया गया. जहां तक बयान के दूसरे हिस्से की बात है, बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की फाइल की गई रिट पिटीशन में 19 जून, 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट के पास किए गए ऑर्डर से स्थिति साफ लगती है. अटॉर्नी जनरल के पत्र में कहा गया, ‘रिट पिटीशन का कंटेंट, राउत के एक्स पोस्ट के दूसरे हिस्से में दिए गए बयानों का विषय है.’
इसमें कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट है कि यह बयान कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीश लंदन में बैडमिंटन खेल रहे थे और भाजपा के लोगों के साथ थे, गलत पाए गए हैं और अदालत का आदेश एक्स पोस्ट की तारीख से पहले का है.
पत्र में आगे कहा गया, ‘यह जरूरी है कि सांसद को ऐसे शर्मनाक आरोप लगाने से पहले फैक्ट्स वेरिफाई कर लेने चाहिए थे.’ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की पिटीशन 15 अक्टूबर को फाइल की गई थी और अटॉर्नी जनरल ने उसी दिन कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 के सेक्शन 15(1)(b) के तहत एक्शन के लिए अपनी मंजूरी दे दी थी.
